2019 के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. मोदी सरकार को फिर से सत्ता पर काबिज होने से रोकने के लिए सभी विरोधी दल एक पाले में आ खड़े हुए हैं. केंद्र सरकार के 4 साल पूरे होने पर एक सर्वे में देश का मूड भांपने की कोशिश की गई है. इस सर्वे के मुताबिक मोदी सरकार 2019 में फिर से परचम लहराएगी, लेकिन इस बार कमल खिलना 2014 जितना आसान नहीं रहेगा.

राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा

एबीपी न्यूज-लोकनीति-सीएसडीएस के इस सर्वे के मुताबिक मोदी आज भी सबसे लोकप्रिय नेता हैं. लेकिन खास बात ये है कि राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है. ये सर्वे 28 अप्रैल 2018 से 17 मई 2018 के बीच 19 राज्यों में 15859 लोगों से बातचीत के आधार पर किया गया है.

49 सीटों का एनडीए को हो सकता है नुकसान

सर्वे के मुताबिक 543 लोकसभा सीट पर अगर आज चुनाव हों तो एनडीए को 274, यूपीए को 164 और अन्य को 105 सीटें मिल सकती हैं. अगर 2014 से इसकी तुलना करें तो एनडीए को 49 सीटों का नुकसान होता दिख रहा, वहीं यूपीए इस बार बड़े फायदे में है. चुनाव की सूरत में यूपीए को 104 सीटें अधिक मिल सकती हैं. अन्य दलों को 48 सीटों का नुकसान हो सकता है.

सहयोगियों का साथ ऐच्छिक नहीं, इस बार अनिवार्य

सीटों के गणित में साफ जाहिर है कि इस बार बीजेपी के लिए अपने दम पर सरकार बनाना मुश्किल है. दिल्ली की कुर्सी पर बैठना है तो इस बार बीजेपी के लिए सहयोगियों का साथ ऐच्छिक न होकर अनिवार्य हो सकता है.

वोट प्रतिशत की ये है स्थिति

वोट प्रतिशत के लिहाज से देखें तो इस बार एनडीए को 37%, यूपीए को 31% और अन्य दलों को 32% वोट मिलने का अनुमान है. उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में बीजेपी को अपेक्षाकृत कम वोट मिल सकते हैं.

विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया तो मुश्किल

बीजेपी का विजय रथ रोकने के लिए जिस तरह से कर्नाटक में सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है, अगर 2019 के सियासी मैदान में भी सभी विपक्षी दल ऐसे ही मिलकर रहे तो बीजेपी के लिए राह थोड़ी कठिन हो जाएगी. हालांकि फिर भी सत्ता से उन्हें दूर नहीं किया जा सकता.

यूपी में अखिलेश-मायावती की संगत दिखाएगी रंगत

यूपी में अगर महागठबंधन हुआ तो एनडीए को 8 फीसदी वोट कम मिल सकता है. यानी 2014 में मिला 43 फीसदी वोट गिरकर 35 फीसदी पर सिमट जाएगा. यूपी में अखिलेश और मायावती साथ चुनाव लड़े तो उन्हें 4 प्रतिशत ज्यादा वोट मिलेगा. सर्वे के मुताबिक यूपीए को 12% और अन्य (एसपी-बीएसपी-अन्य दल) को करीब 53% वोट मिल सकते हैं.

राजस्थान में भी 10 फीसदी वोटों का नुकसान

महागठबंधन सिर्फ यूपी में ही नहीं, अन्य राज्यों में भी बीजेपी के लिए परेशानी बढ़ा सकता है. राजस्थान में भी एनडीए को 10 फीसदी वोट शेयर का नुकसान हो सकता है. 2014 में मिले 55 फीसदी वोट इस चुनाव में 45 फीसदी ही रह सकते हैं. वहीं यूपीए फायदे में रह सकती है. इस बार यूपीए 12 प्रतिशत बढ़त के साथ कुल 30 फीसदी वोट हासिल कर सकती है.

पूर्वी भारत में बीजेपी को फायदा

सर्वे में बीजेपी को पूर्वी भारत की 142 सीटों में 90 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं यूपीए यहां कमजोर दिख रही है. यूपीए को पूर्वोत्तर से सिर्फ 22-26 जबकि अन्य 26-30 सीट पा सकते हैं. यानि 2014 से तुलना करें तो इस बार यहां बीजेपी पहले से अधिक मजबूत है. बीजेपी को इस बार 32 सीटें अधिक मिल सकती हैं. बिहार में नीतीश कुमार का एनडीए के साथ आना भी बीजेपी के लिए फायदे का सौदा होता दिख रहा है.

बंगाल में बीजेपी को बढ़त पर ‘दीदी’ से पीछे

पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहां एनडीए को इस बार 24 प्रतिशत, यूपीए को 11 और अन्य को 65 फीसदी वोट मिल सकते हैं. एनडीए को यहां 2014 में सिर्फ 17 फीसदी वोट मिले थे. यहां आज भी सत्ताधारी दल टीएमसी सबसे बड़ी पार्टी है.

मध्य प्रदेश में कम हो सकता है वोट प्रतिशत

पश्चिम और मध्य भारत में 118 सीटों में से एनडीए को 70 से अधिक सीटें मिल सकती हैं. यूपीए 41 से 47 सीट पाती दिख रही है. इस बार मध्य प्रदेश से बीजेपी को ज्यादा नुकसान हो सकता है.  यहां 2014 के मुकाबले पार्टी को 14 प्रतिशत वोट कम मिल सकता है.

गुजरात में भी हो सकता है नुकसान

सर्वे में पीएम मोदी के राज्य गुजरात में एनडीए के खाते में 54 फीसदी और यूपीए के खाते में 42 फीसदी वोट आते दिख रहे हैं. 2014 में गुजरात में बीजेपी गठबंधन को 59% वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस गठबंधन को 33% वोट मिले थे. इस बार यहां से बीजेपी को 5 प्रतिशत कम वोट मिल सकता है. इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा, जिसका वोट प्रतिशत 9% बढ़ सकता है.

दक्षिण भारत में यूपीए को फायदा

दक्षिण भारत की बात करें तो यहां के 6 राज्यों की 132 सीटों पर एनडीए को नुकसान हो सकता है. चुनाव की सूरत में एनडीए को सिर्फ 18 से 22, यूपीए को 65 से 75 और अन्य को 38 से 44 सीटें मिलने की संभावना है. पिछले चुनाव में यहां से एनडीए को 23, यूपीए को 21 और अन्य को 88 सीटें मिलीं थीं.

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